बीमा आपके जीवन में आने वाले जोखिमों को प्रबंधित करने का एक तरीका है। जब आप बीमा खरीदते हैं तब आप अप्रत्याशित वित्तीय नुकसान के खिलाफ सुरक्षा भी खरीदते हैं। बीमा कंपनी आपको या आपके द्वारा चुने गए किसी व्यक्ति अर्थात नामिनी को किसी विशेष प्रकार के जोखिम के घटित होने पर भुगतान करती है।

यह एक प्रकार का अनुबंध होता है, जिसमें एक व्यक्ति कांट्रेक्टर होता है तथा दूसरा कॉन्ट्रैक्टी होता है। इस  अनुबंध में एक व्यक्ति किसी अप्रत्याशित घटना  की आशा करते हुए दूसरे व्यक्ति या संस्था के उसे अथवा उस पर आश्रित व्यक्ति को उस विशेष परिस्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए कुछ  मुल्य अदा करता है।

यह किस प्रकार से किसी व्यक्ति की डिफिकल्ट सिचुएशन में मदद करता है?

इस प्रश्न का जवाब जाने के लिए सबसे पहले यह जानना होगा कि इंश्योरेंस कितने प्रकार का होता है तथा उनसे किस प्रकार की सुरक्षा मिलती है।

इंश्योरेंस के मुख्य प्रकारों में हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, वाहन इंश्योरेंस आदि जैसी चीजें आती हैे।

जब हम कुछ पैसे देकर स्वयं का जीवन बीमा या दुर्घटना बीमा करवाते हैं तो इस परिस्थिति में अगर हमारे साथ भी किसी भी प्रकार की दुर्घटना घटित होती है तो हमें  बीमा कंपनी  मुआवजा  देती है।

ठीक इसी प्रकार अगर हमने हेल्थ इंश्योरेंस लिया होता है तो विशेष प्रकार के बीमारियों में कंपनी हमारे ईलाज का खर्च वहन करती है तथा ऐसे मुश्किल परिस्थितियों में हमारे लाखों रुपए बचाने में मदद करती है।

ऐसे ही अगर वाहन इंश्योरेंस को देखें तो कंपनी इस प्रकार के व्यक्ति की वाहन दुर्घटना से मौत होने या क्षतिग्रस्त होने तथा किसी अन्य व्यक्ति को हमारे वाहन द्वारा क्षति होने पर उसे भी मुआवजा प्रदान करती है। इसके अलावा इस प्रकार के बीमा में कंपनी वाहन के मूल्य को निर्धारित कर उस वाहन के  क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में मुआवजा प्रदान करती है

आपको बीमा खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

बीमा हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय वस्तु है इसलिए बीमा से जुड़ी तमाम तरह की बातों को जानना हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि कई बार हम जल्दबाजी में बीमा तो ले लेते हैं लेकिन क्लेम करते समय उसमें तरह-तरह की दिक्कते आती हैं।

इसलिए हमें बीमा खरीदते वक्त सबसे पहले यह निर्धारित करना होता है की उस पॉलिसी में लिया जाने वाला प्रीमियम कहीं किसी और कंपनी से ज्यादा तो नहीं लिया जा रहा अथवा अगर प्रीमियम कम लिया जा रहा है तो उसके पीछे छिपे हुए कारण क्या है इसमें किस प्रकार का कवर प्रदान किया जा रहा है तथा किस प्रकार के कवर को इग्नोर किया जा रहा है।

इसके अलावा हमें उस पॉलिसी की सभी शर्तों का भी विस्तार से आकलन करना होता है क्योंकि इसके द्वारा किसी निश्चित परिस्थिति में पॉलिसी के ना काम करने की संभावना को हम पहले ही पहचान सकते हैं तथा अपने अनुकूल किसी अन्य पॉलिसी को ले सकते हैं

इसी प्रकार हमें हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय में अपने किसी विशेष बीमारी के बारे में बीमा कंपनी को बताना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि बाद में कंपनी इसी बात को आधार बना कर हमें  बीमा कवर प्रदान करने से मना कर सकती है।